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03 मार्च 2021
03 मार्च 2021

Gujrat

बर्ड फ्लू का कहरः पोल्ट्री फार्म के संचालकों को सर्तकता बरतने का निर्देश

Posted on: Thu, 07, Jan 2021 9:19 PM (IST)
बर्ड फ्लू का कहरः पोल्ट्री फार्म के संचालकों को सर्तकता बरतने का निर्देश

भरुच, गुजरातः (बीके पाण्डेय) राजस्थान, मध्यप्रदेश, केराला व हिमांचल प्रदेश में बर्ड फ्लू का कहर होने के बाद गुजरात का पशुपालन विभाग हरकत में आ गया है। भरुच जिले में सौ से ज्यादा पोल्ट्री फार्म के संचालको को सर्तक रहने के लिए सूचित किया गया है। मुर्गों की शंकास्पद मौत होने पर तो तत्काल पशुपालन विभाग को जानकारी देने के लिए कहा गया है।

फिलहाल अभी तक पूरे जिले में पक्षियों में शंकास्पद बीमारी व मौत होने की कोई घटना सामने नही आई है। गुजरात में बर्ड फ्लू का खतरा बना हुआ है। भरुच शहर के भीतर एक भी पोल्ट्री फार्म नही है मगर शहर के चारो ओर व जिले में सौ से ज्यादा पोल्ट्री फार्म स्थित है। जिला पंचायत के पशुपालन विभाग ने सभी पोल्ट्री फार्म के संचालको को सर्तकता बरतने के लिए सूचित किया है। मुर्गो की मौत होने पर तत्काल पशुपालन विभाग को जानकारी देने के लिए कहा गया है। जिले में फिलहाल कोई पक्षियों की मौत नही होने से विभाग ने राहत की सांस ली है।

पक्षियों का होता है आरटीपी सीआर टेस्टः

पूरी दुनिया में कोरोना की महामारी फैली हुई है। इसमें से भरुच जिला भी अछूता नही रहा है। वहीं बर्ड फ्लू को लेकर चिंता के बादल घिरे हुए हैं। जिस तरह से कोरोना के मरीजों का आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाता है उसी तरह से बर्ड फ्लू में पक्षियों का भी आरटी पीसीआर टेस्ट कराया जाता है।

चौदह साल पहले आया था बर्ड फ्लू का केसः

राज्य में चौदह साल पहले बर्ड फ्लू का केस सामने आया था। वर्ष 2006 में सूरत जिले की उच्छल तहसील में बर्ड फ्लू का पाजिटिव केस सामने आया था। इसके बाद से पूरे प्रदेश में बर्ड फ्लू का कोई भी केस सामने नही आया था।

जंगल सफारी पार्क पर नही कोई खतराः

केवडिया में स्थित विश्व की सबसे उंची प्रतिमा स्टेच्यू आँफ यूनिटी के पास बनाये गये जंगल सफारी पार्क में बर्ड फ्लू को लेकर पूरी सर्तकता बरती जा रही है। फिलहाल यहा पर बर्ड फ्लू का कोई खतरा नही मंडरा रहा है। जंगल सफारी से जुड़े कर्मचारियों की ओर से पशु पक्षियों की पूरी देखभाल व उनकी हरकतों पर पैनी नजर रखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि जंगल सफारी पार्क में विविध देशों से लाकर पशु पक्षियों को रखा गया है व उन्हें उसी हिसाब से प्राकृतिक वातावरण भी उपलब्ध कराया गया है।