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21 अक्टूबर 2020
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कृषि/बागवानी

कारगर साबित हो रही है, स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति

Posted on: Mon, 16, Dec 2019 9:13 PM (IST)
कारगर साबित हो रही है, स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति

आज कृषि उद्योग एवं पेयजल आपूर्ति हेतु विभिन्न आवश्यकताओं के लिए पानी की उपयोगिता बढ़ गई है। पानी को व्यवस्थित ढंग से उपयोग न करने पर जल स्तर में गिरावट भी आ रही है। निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या और जल स्त्रोतों के असीमित दोहन से जल की आवश्यकता बढ़ी है। जल का सीमित उपयोग करके किसान अधिक उत्पादन ले सकते हैं।

प्रदेश में केन्द्रीय सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर पद्धति (फौव्वारा पद्धति) से फसलों की सिंचाई डार्क, सेमी डार्क क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ी उपयोगी सिद्ध हो रही है। किसानों फसल की सिंचाई के लिए नहर, नलकूप, तालाब, कुएें, झील, नदियों आदि के पानी का उपयोग करते है। किन्तु सिंचाई के इन तरीकों में स्प्रिंकलर पद्धति एक ऐसी पद्धति है, जिसे अपनाकर जल प्रबन्धन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा रहा है। यह सिंचाई की उन्नत और आधुनिक पद्धति है। इस पद्धति से सिंचाई क्यारियों में न करके पाइपों एवं नोजलो के माध्यम से वर्षा के रुप में की जाती है।

फौव्वारा पद्धति में प्लास्टिक अथवा अल्युमिनियम पाइपों को खेत में जाल की तरह बिछाकर ऊँचे-नीचे, रेतीले, पहाड़ी व पथरीली किसी भी प्रकार की जमीन पर सहजता से सिंचाई की जा सकती है। यह पद्धति जल संरक्षण के साथ-साथ मृदा अपरदन रोकने तथा भू-संरक्षण में भी सहायक होती है। क्योंकि इस विधि से सिंचाई करते समय जल बाहर नहीं जाता है। बोई गई फसल और भूमि की नमी बरकरार रहती है। फौव्वारा पद्धति से सिंचाई करने पर क्यारियों के माध्यम से की गई सिंचाई की अपेक्षा 30 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है।

इस बचे हुए पानी से किसान अपनी फसल के क्षेत्र को बढ़ा सकते हैं। भूमिगत जल स्तर को सुदृढ़ करने में भी यह विधि सहायक है। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुना करने के लिए उन्हें हर स्तर पर सहायता दे रही है। सरकार द्वारा स्प्रिंकलर पद्धति से सिंचाई करने के लिए स्प्रिंकलर सेट क्रय हेतु लघु एवं सीमान्त किसानों को 90 प्रतिशत तथा सामान्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान दे रही है। प्रदेश के किसान सरकार की इस नीति का लाभ ले रहे है। बस्ती सूचना विभाग द्वारा प्रसारित