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09 फ़रवरी 2023
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कृषि/बागवानी

देडियापाडा के बीस गांवों में बाजरे की खेती कर रहे हैं किसान

Posted on: Mon, 16, Jan 2023 6:20 PM (IST)
देडियापाडा के बीस गांवों में बाजरे की खेती कर रहे हैं किसान

नर्मदा, गुजरातः (बीके पाण्डेय) देडियापाडा तहसील के बीस गांवों में रहने वाले किसान एक बार फिर से परंपरागत खेती की ओर मुडऩे लगे हैं। तहसील के बीस गांवों के किसानों की ओर से बाजरे की खेती की जा रही है। पिछले तीन साल में बाजरे की बुवाई में चालीस प्रतिशत तक इजाफा हुआ है।

नर्मदा जिले में आदिवासी समाज की आबादी बाहुल्य देडियापाडा तहसील में किसान बाजरा,जुवार,रागी,कंगनी,कोदो सहित के मिलेटस की केटेगरी में आने वाले फसलों की बुवाई की ओर रुचि ले रहे हैं। एक समय में इस तहसील के किसान पर्याप्त साधनों के अभाव में अन्य फसलों की ओर मुड़ गये थे मगर एनजीओ की मदद से वे एक बार फिर से अपनी पुरानी परंपरागत खेती को करने के लिए वापस आ गये हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगो को अपने मूल पौष्टिक खुराक की ओर वापस लाने के लिए संसद भवन में सभी सांसदों के लिए मिलेटस (बाजरा) में से बने व्यंजनों को परोसवाने का काम किया था।

तभी से मिलेटस (बाजरा) चर्चा में आ गया है। मिलेटस मे आने वाले बाजरा के अलावा जुवार, रागी, कंगनी, कोदो जैसी धान्य की खेती को बढ़ाने के लिए इस साल को अंन्तर्राष्ट्रीय मिलेटस वर्ष 2023 घोषित किया गया है। मिलेटस की खेती के बारे में 2019 से अहमदाबाद की ग्रीन हब फाउंडेशन देडियापाडा तहसील में अभियान चला रही है। देडियापाडा तहसील में होने वाली कुल खेती में से 40 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेटस की हो गई है। पिछले तीन साल में मिलेटस क ी बुँवाई में इजाफा हुआ है।

क्यों हुई थी कमी

देडियापाडा तहसील में अधिकतर किसान आदिवासी है व वे अपनी पहाड़ी जमीन में कृषि करते रहते हैं। वे अपने परंपरागत फसलों को छोडक़र चावल की खेती की ओर मुड़ गये थे व इसका कारण यह था कि धान को वे चक्की पर ले कर जाते थे तो उसमें से आसानी से चावल निकल जाता था दूसरी ओर कोदो, जुवार फसलों को पीसने के लिए साधनों की सुविधा नही होने से इसकी बुवाई का रकबा घट गया था।

मिल गया परिणाम

ग्रीन हब फाउंडेशन द्रारा मिलेटस के धान्य को कांकरी निकालने,बीनने व वैक्यूम कर साफ कर पोलिस करने के लिए मशीने लगाई गई हैं। इन मशीनों का लाभ किसानों को मिलना शुरु होने से वे एक बार फिर से अपनी विरासत वाली फसलों की ओर मुड़ गये। वर्तमान में पूरी देडियापाडा तहसील में 40 प्रतिशत मिलेटस की खेती की जा रही है। मिलेटस अब धीमे धीमे लोगो के दैनिक जीवन का एक हिस्सा बनने लगा है। तहसील के बीस से ज्यादा गांवों में 140 हेक्टेयर में मिलेटस की खेती की जा रही है।

किया जा रहा है जागरुक

ग्रीन हब फाउंडेशन के अग्रणी सुनील त्रिवेदी ने बताया कि देडियापाडा तहसील में हम लोगो ने चलो मिलेटस के बारे में जानकारी देने के लिए कार्यक्रम रखा था जिसमें मिलेटस व अन्य धान्यों के बारे में रोचक जानकारी किसानों को दी गई थी। इसके अलावा लाल चावल,काला चावल, काला गेंहूं जैसे अन्य मोटे अनाज तथा जुवार की विविध किस्मों का प्रर्दशन किया गया था व लोगो को जागरुक किया गया जिसका अच्छा परिणाम मिला।

क्या है मिलेटस

मिलेटस के रुप में पहचाने जाने वाले धान्य में भरपूर मात्रा में न्यूट्रीऐंट होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई, बी काम्पलेक्स, नियासिन,थाईमीन व रिबोफ्लाविन की अच्छी मात्रा होती है। मिलेटस में मेथोनाईन व लेसिथिन जैसे अमीनो एसिड व आयरन,मैग्नीशियम, फास्फोरस व पोटेशियम जैसे खनिज भी होते हैं। इसमें फाईबर भी होता है जो ब्लड सुगर का नियंत्रण करता है।


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