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05 दिसंबर 2021
05 दिसंबर 2021

कृषि/बागवानी

बौने काला नमक धान के जनक डा ए.के. सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण किया

Posted on: Sun, 07, Nov 2021 4:20 PM (IST)
बौने काला नमक धान के जनक डा ए.के. सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण किया

बस्तीः बौने काला नमक धान के जनक डा ए.के. सिंह ने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण किया। उनके साथ गोविंद राजू एन.एस. आयुक्त, बस्ती, डॉ बी.एन. सिंह, चेयरमैन शोध एवं विकास केंद्र गोरखपुर भी मौजूद थे। कार्यक्रम में जनपद के प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने काला नमक धान की विभिन्न प्रजातियों का ट्रायल एवं मूंगफली अनुसंधान संस्थान जूनागढ़, गुजरात की मूंगफली की विभिन्न प्रजातियों का ट्रायल तथा पाली हाउस में लगे हुए खीरा, शिमला मिर्च, चेरी टमाटर, परवल की फसल एवं नेट हाउस में फल पौध नर्सरी एवं फलों की मातृ पौधशाला, ड्रैगन फ्रूट, लोगन फूड, एकीकृत फसल प्रणाली, बरबरी बकरी पालन इकाई, कड़कनाथ मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, वर्मी कंपोस्ट, अजोला इकाई, गुण प्रसंस्करण कांप्लेक्स, कम अवधि की अरहर, मडुआ की फसल आदि का निरीक्षण किया तथा प्रसन्नता व्यक्त की और इस केंद्र को तकनीकी एवं कृषकों की आय संवर्धन के रूप में विकसित करने हेतु वैज्ञानिकों की सराहना की।

मंडलायुक्त श्रीयुत गोविंद राजू एन.एस., ने काला नमक धान उत्पादक कृषक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में कहा कि काला नमक धान एक जनपद एक उत्पाद के रूप में चयनित है. इसके क्षेत्रफल और बढ़ाने की आवश्यकता है। डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, काला नमक की उत्पादकता एवं सुगंध को बढ़ाने के लिए निरंतर नए शोध करके अधिक उत्पादन देने वाली झुलसा रोगरोधी प्रजातियां विकसित कर रहा है। .यह नवीनतम प्रजातियां इस जनपद में कितनी उपयुक्त है उसी के उद्देश्य से 11 केंद्रों पर काला नमक धान का ट्रायल लगाया गया है. जिसे आप सभी को देखना चाहिए।

डॉ. बी. एन. सिंह. चेयरमैन शोध एवं विकास केंद्र गोरखपुर ने अवगत कराया कि काला नमक धान की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी मांग आज पूरे भारत में है तथा इसका अच्छा दाम भी लोग दे रहे हैं। केंद्र के अध्यक्ष प्रो. एस. एन. सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अवगत कराया कि काला नमक धान के उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाने हेतु विगत कई वर्षों से इसका ट्रायल लगाया जा रहा है तथा चयनित उपयुक्त प्रजाति का बीज उत्पादित करके इस केंद्र के माध्यम से विक्रय भी किया गया है आगे भी किया जाएगा।


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