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24 नवंबर 2020
24 नवंबर 2020

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न्यायिक प्रक्रिया इतनी लम्बी क्यों ?

Posted on: Fri, 23, Oct 2020 9:24 AM (IST)
न्यायिक प्रक्रिया इतनी लम्बी क्यों ?

हमारे देश में न्यायिक प्रक्रिया इतनी जटिल और लम्बी होती जा रही है कि न्याय खुद दम तोड़ता नजर आ रहा है। मुकदमा लड़ने में पीढ़ियां खत्म हो जाती हैं। कितनों की हैसियत भी खत्म हो जाती है लेकिन 75 साल पुराने सड़े गले सिस्टम को सुधारने की बात कोई नही करता। नेता हों या सामाजिक कार्यकर्ता 20-25 या 40-50 साल तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर कोई सवाल नही उठाता।

कई बार फैसले तब आते हैं जब न पीड़ित जिंदा रहता और न आरोपी। अदालतों का सम्मान करना और बात है और सिस्टम में सुधार और बात है। छोटे छोटे जमीनी विवाद जो राजस्व कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की निष्पक्ष कार्यवाही से स्थानीय स्तर पर निस्तारित हो सकते हैं उन्हे भी कोर्ट तक जानबूझकर पहुंचाया जाता है। हजारों लाखों केस के बोझ से न्यायिक प्रक्रिया कराह रही है, पीड़ितों को समय से न्याय नही मिल रहा है। उन्हे वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। न कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की बात करता है और न ही समयबद्ध निस्तारण की। बस सबके स्वार्थ सिद्ध हो रहे हैं सभी मौन हैं।

जिन किसानों के बैंक खातों में 2000 रूपये भेजकर उनके चेहरों पर अस्थाई खुशी तलाशी जा रही है उन्हे मुकदमों और जमीनी विवाद से छुटकारा मिल जाये तो वे खुद तरक्की और आत्मनिर्भरता की राह पर चल पड़ेंगे। सिस्टम की खामियों को समझने के लिये ताजा उदाहरण काफी होगा। दरअसल केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री रह चुके शिव प्रताप शुक्ला के खिलाफ छात्र जीवन में 1975 में मारपीट और डकैती का एक मामला दर्ज किया गया था। 45 साल बाद गोरखपुर की एक अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किया है। मामला उस वक्त का है जब राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला छात्र राजनीति में सक्रिय थे। हंसी भी आती है और अफसोस भी होता है।

1975 से आज तक श्री शुक्ला तमाम महत्वपूर्ण पदों पर रहे। जनता के बीच सम्मान पाते रहे। यदि इस मामले में उन्हे आज सजा हो जाये तो वे लोग जो उन्हे फल मालायें पहनाते रहे खुद को कितना गौरवान्वित महसूस करेंगे ? फिलहाल पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला के खिलाफ अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट राहुल दुबे ने गैर जमानती वॉरंट जारी किया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ कुर्की का नोटिस भी जारी हुआ है। 1975 में उनके खिलाफ मारपीट और डकैती का मामला कोतवाली थाने में दर्ज किया गया था।

इस मामले में केंद्रीय मंत्री 1986 से कोर्ट में हाजिर नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक मामले का समयबद्ध निपटारा करने के लिए कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वॉरंट और कुर्की का आदेश जारी किया है। हालांकि उन्होने कहा हम आदलत का सम्मान करते हैं। लेकिन सवाल सिस्टम से है आखिर न्यायिक प्रक्रिया इतनी लम्बी क्यों ? क्या ऐसा संभव नही है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाते हुये जनता को न्याय दिलाने के लिये समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया शुरू की जाये ? सबकुछ संभव है। देश के नीति नियामकों को जनता का वास्तविक दर्द समझना होगा और इस बारे में महत्वपूर्ण फैसले लेने होंगे जिससे न्याय जिंदा रहे और न्याय पाने वाले के चेहरे पर मुस्काराहट हो और साजिश रचने वाले हतोत्साहित हों।