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14 अप्रैल 2021
14 अप्रैल 2021

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सर्फ एक्सेल से भी नही हटेंगे खाकी के दाग

Posted on: Sat, 27, Mar 2021 9:57 PM (IST)
सर्फ एक्सेल से भी नही हटेंगे खाकी के दाग

बस्तीः पुलिस पर लगे दाग सर्फ एक्सेल भी नही हटेंगे। पिछले एक साल में जनपद पुलिस के कारनामे पूरे प्रदेश को हैरान कर रहे हैं। लोग कहते हैं गलतियों से सबक लिया जाता है लेकिन यह उसके लिये है जिसमे चरित्र हो। यहां तो पुलिस गुण्डों की तरह काम कर रही है, ओर गुण्डों का भला कौन चरित्र। वे तो टारगेट फिक्स करते हैं और हर कीमत पर उसे पा लेते हैं।

इसके लिये उन्हे कितना गिरना पड़ेगा या कितनी बेहयाई करनी पड़ेगी कोई मायने नही रखता। लूट, छेड़छाड़ बलात्कार, फर्जी मुठभेड़ सहित तमाम गंभीर अपराधों में पुलिस की संलिप्तता या संरक्षण के रिकार्ड पहले ही कायम हो चुके हैं। ताजा वाकया जिसने यह लिखने को मजबूर किया उसके बारे में जानकर पुलिस से और नफरत हो जायेगी। दरअसल होली और शब ए बारात त्योहारों के मद्देनजर नवागत पुलिस कप्तान ने गांधीनगर इलाके में पैदल मार्च निकाला था। मकसद था कि जनमानस को सुरक्षा का अहसास कराया जाये जिससे लोग निडर होकर पुलिस से जुड़े और मुश्किलें शेयर करते रहें और उनका समय रहते समाधान हो सके।

किन्तु असली डर तो पुलिस से ही है, उसे आम जनमानस के अंदर से कैसे निकालेंगे कप्तान साहब। फिलहाल पैदल मार्च रोडवेज पर पहुंचकर समाप्त हो गया। यहां से चार पुलिसकर्मियों को वापस कम्पनी बाग जाना था। नेहरू तिराहे पर चारों एक टैम्पू में बैठ गये, मना करने के बाद भी कि उन्हे मालवीय रोड जाना है, सवारियां भी हैं। लेकिन अपने चिर परिचित अंदाज में उन्होने ड्राइवर को धमकाते हुये है कि मारेंगे अभी मूत मारोगे। अर्दब में लेकर गांधीनगर इलाके से होकर चलने को कहा। उन्होने सवारियों के साथ भी सहानुभूति नही दिखाई। सवारियां गांधीनगर में उमर गयीं जहां से वे मालवीय रोड पर आसानी से जा सकती थीं। टैम्पू कम्पनी बाग पहुंचा।

बगैर किराया दिये चारों पुलिसकर्मी धौंस दिखाते हुये चले गये। रोडवेज से लेकर कम्पनी बाग तक वे ड्राइवर के सम्मान को रौंदते रहे। एक टैम्पू ड्राइवर मालिक को देने के बाद 200 स्पया बचा पाता है, लेकिन ये दो सौं रूपये इतने पर्याप्त होते हैं कि एक पुलिसकर्मी से कई गुना उसका आत्मसम्मान होता है। एक गुण्डा भी बैठता टैम्पू पर तो वह शायद किराया देकर जाता, इसीलिये ऐसा लगता है कि अपवादों को छोड़ िउया जाये तो असली खतरा पुलिस से है। पीड़ित चालक से जांबाज पुलिसकर्मियों का नाम जानना चाहा तो उसने कहा वे गालियां देते रहे, हिम्मत नही हुई उनके नेम प्लेट देखने की।