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04 अगस्त 2020
04 अगस्त 2020

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8 पुलिस जवानों की शहादत पर सवालों के जवाब ढूढ़ रही है यूपी की जनता भारत

Posted on: Sat, 04, Jul 2020 12:06 AM (IST)
8 पुलिस जवानों की शहादत पर सवालों के जवाब ढूढ़ रही है यूपी की जनता भारत

कानपुर जनपद में थाना चौबेपुर के विकरू गांव में गुरुवार की रात हिस्ट्रीशीटर विकास दूबे को पकड़ने गयी पुलिस टीम के 8 जवानों को बदमाशों ने गोलियों से छलनी कर दिया जिसमे डीएसपी समेत 8 जवान शहीद हो गये। घटना के के बाद एन्काउन्टर स्पेशलिस्ट आईजी मोहित अग्रवाल ने कमान संभाला। पुलिस ने पूरे गांव को घेर लिया है। दावा किया जा रहा है कि विकास दूबे और उसके साथी गांव से बाहर नही जा पाये हैं। 3 अपराधियों को ढेर किया जा चुका है। यूपी में श्रीप्रकाश शुक्ला के एनकाउण्टर के बाद ऐसी घटना नही सुनी गयी थी।

बताया जाता है श्रीप्रकाश जब पुलिस टीम से घिर गया था तो उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी और एक जवान शहीद हो गया था। लेकिन इस कांड में पुलिस महकमे से ही गद्दारी की बू आ रही है। गुरुवार देर रात सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में बिठूर, चौबेपुर, शिवराजपुर थानों की संयुक्त पुलिस टीमें अपराधी विकास दुबे को पकड़ने के लिए उसके गांव विकरु पहुंची और घेराबंदी करते हुए बदमाश की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया। इस बीच पुलिस के गांव में आने की भनक अपराधियों को लग गई। बदमाश के गुर्गों ने विकास के घर के दरवाजे पर जेसीबी खड़ी कर दी, कुछ लोग उसकी आड़ में और कुछ मकान की छतों पर पोजीशन लेकर बैठ गये। मौका देखते ही बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू दी।

बदमाशों की फायरिंग में सीओ, थानाध्यक्ष, दो दारोगा व चार सिपाहियों को गोली लगने से अफरा-तफरी मच गई। यह जानकारी आलाधिकारियों को दी गई। साथ ही घायल पुलिस कर्मियों को लेकर उनके साथी बदमाशों की फायरिंग के बीच से निकालकर पास के अस्पताल पहुंचे जहां उनका उपचार शुरू हुआ। एडीजी ने बताया कि बदमाशों की फायरिंग में सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा, शिवराजपुर थानाध्यक्ष महेश कुमार, बिठूर थाना के मंधना चौकी इंचार्ज अनूप सिंह, शिवराजपुर थाने में तैनात एसआई नीबू लाल, कांस्टेबल सुल्तान व तीन अन्य सिपाही शहीद हो गए जबकि चार पुलिस कर्मी घायल भी हैं।

घटना की जानकारी होने पर एडीजी जोन जय नारायण सिंह, आईजी रेंज मोहित अग्रवाल, मौके पर पहुंच गये और घटना के सभी पहलुओं पर नजर दौड़ाया। आठ पुलिस कर्मियों की हत्या करने वाले विकास दुबे का अच्छा खासा आपराधिक इतिहास है। चौबेपुर थाने थाने के हिस्ट्रीशीटर के अलावा उस पर 60 से ज्यादा आपराधिक मुकदमें दर्ज है। वह पहली बार 11 नवम्बर साल 2001 में भाजपा के तत्कालीन दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या के बाद चर्चा में आया था। इस घटना को उसने थाने में घुसकर अंजाम दिया था। इस मामले में कोई पुलिसवाला गवाही तक का साहस नही जुटा पाया था।

31 अक्टूबर 2017 को यूपी एसटीएफ ने उसे उसकी बुआ के घर लखनऊ से दबोचा था। उसका लोगों में इतना भय था कि कोई गवाह उसके सामने नहीं आया। इसके कारण वह केस से बरी हो गया। विकास दुबे की शादी शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क के पास रहने वाले राजू खुल्लर की बहन से हुई थी। वह ब्राह्मण शिरोमणि पंडित विकास दुबे के नाम से फेसबुक पेज बना रखा था। पुलिस रिकार्ड के मुत​बिक, 25 हजार का इनामी विकास दुबे की राजनैतिक दलों में भी अच्छी पकड़ है। जेल में रहते हुए उसने शिवराजपुर से नगर पंचायत का चुनाव जीता था। प्रधान भी रहा चुका है। पूर्व की बसपा सरकार में रहते हुए उसने गांव की कई जमीनों पर अवैध कब्जे कर गैर कानूनी तरीकों से काफी सारी संपत्ति बनाई ली है। उस वक्त बिल्हौर, शिवराजपुर, रिनयां, चौबेपुर के साथ ही कानपुर नगर में विकास दुबे के नाम का सिक्का चलता था।

सहायक प्रबंधक की थी हत्या

पुलिस रिकार्ड के अनुसार साल 2000 में कानपुर देहात के शिवली थानाक्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में भी विकास का नाम आया था। इसके बाद शिवली थानाक्षेत्र में ही सन 2000 में रामबाबू यादव की हत्या का साजिश विकास ने जेल में ही रची थी। इसके बाद साल 2004 में केबिल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या का भी आरोपित है।

पुलिस के 8 जवानों की शहादत पर राजनीति कतई नही होनी चाहिये। लेकिन सवालों को जवाब का इंतजार जरूर रहेगा और सवाल ये है कि 60 गंभीर मामलों के आरोपी को राजनीति में कैसे एण्ट्री मिली, पुलिस ने उसे पकड़ा वह जेल गया, फिर ऐसे गंभीर अपराधियों की जमानत आखिर किस बुनियाद पर हो जाती है। बार बार गंभीर अपराधों को अंजाम देकर बदमाश आम जनता के बीच रहता है, उसे डराता है और गांव इलाके में खुद की सरकार चलाता है क्यों। विकास अपने गांव में रहकर इलाके में अपना सिक्का चलाता था, प्रदेश सरकार का खुफिया तंत्र आखिर क्या कर रहा था। उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ आबादी सरकार से ये सवाल पूछ रही है, देर सबेर इसका जवाब सरकार को देना होगा।