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22 अप्रैल 2024
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यूपी को लगा रिश्वतखोरी का रोग

Posted on: Sat, 09, Mar 2024 12:33 PM (IST)
यूपी को लगा रिश्वतखोरी का रोग

किसी भी व्यवस्था में यदि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का रोग लग जाए तो वह बीमार हो जाती है। यूपी का यही हाल है। इस रोग से मुक्ति मिल जाए तो प्रदेश का उद्धार हो जाएगा। हैरानी इसलिये ज्यादा होती है कि यहां की बागडोर एक सन्यासी के हाथ में है। विजिलेंस ब्यूरो जैसी संस्थाएं इसके मुकम्मल इलाज में लगी भी हैं, लेकिन बीमारी गंभीर हो चुकी है।

बिना सामाजिक सहभागिता व सरकार के दृढ़ निश्चय के इससे उबर पाना बेहद मुश्किल लगता है। हालांकि जनता यह उम्मीद करती है कि सरकार रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ और सख्त कदम उठाएगी। आम जनता को भी रिश्वत देकर काम कराने की आदत छोडनी होगी, तभी इस रोग का कारगर इलाज संभव है। रिश्वतखोरी के कुछ ताजा मामले जो फरवरी माह के हैं। आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

पहला मामला कानपुर देहात का है। यहां एक किसान की शिकायत पर लेखपाल को एंटी करप्शन लखनऊ की टीम ने पकड़ लिया। दमनपुर गांव के किसान मन्ना सिंह ने खेत के पारिवारिक बंटवारे के लिए तहसील सिकंदरा में प्रार्थना पत्र दिया था। क्षेत्रीय लेखपाल संजीव सचान ने इस काम के लिये उनसे 20 हजार रुपए की मांग की थी। 18 हजार रुपये में बात तय हो गई। सिकंदरा रोड पर लेखपाल ने जैसे ही 18 हजार रुपये मन्ना के हाथ से पकड़े एंटी करप्शन टीम ने उसे पकड़ लिया।

दूसरा मामला अमरोहा का है। यहां आरटीओ कार्यालय में तैनात बाबू को एंटी करप्शन टीम ने बीस हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। आरोपी बाबू ने एक ट्रैक्टर एजेंसी संचालक से फाइल रिन्यूवल करने के नाम पर रिश्वत मांगी थी। उसने रिश्वत की वसूली के लिये निजी स्तर पर एक सहायक भी रखा था। अमरोहा देहात थाना इलाके के गांव नारायणपुर निवासी राजेंद्र सिंह की ट्रैक्टर की एजेंसी है। उनसे आरटीओ कार्यालय में तैनात बाबू अमय सिंह फाइल का रिन्यूअल करने के नाम पर 20 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। एंटी करप्शन टीम ने 20 हजार रुपए रिश्वत लेते बाबू को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

तीसरा मामला बरेली का है। यहां एंटी करप्शन की टीम ने शाहदाना स्थित विद्युत उपकेंद्र कार्यालय से 20 हजार की रिश्वत लेते संविदा कर्मचारी अरविंद कुमार को अरेस्ट किया। पूछताछ में कर्मचारी अरविंद ने एंटी करप्शन के अधिकारियों को बताया कि यह रिश्वत एसडीओ गौरव शर्मा के लिए ली थी। शिकायतकर्ता बारादरी के नवादा शेखान निवासी राकेश कुमार ने बताया कि उसका बिजली बिल बकाया होने के चलते कनेक्शन काट दिया गया था। बिल जमा करने के बाद भी कनेक्शन नहीं जोड़ा गया। इस मामले में वह एसडीओ से मिला, उसने कहा कि अरविंद से मिल लो। अरविंद ने उससे 20 हजार रूपये रिश्वत मांगी।

चौथा मामला मुरादाबाद का है। यहां एंटी करप्शन ब्यूरो ने 5000 की रिश्वत लेते हुए दरोगा महेशपाल सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। दरोगा ने एक शस्त्र लाइसेंस को निरस्त करने की रिपोर्ट नहीं देने की एवज में 20 हजार रुपये घूस मांगा था। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव बिशनपुर भीमाठेर निवासी निजार खां का कहना है कि पुलिस ने मारपीट की एक घटना के बाद उसका शस्त्र लाइसेंस कैंसिल करने की रिपोर्ट लगा दी थी। लाइसेंस खारिज करने की रिपोर्ट को आगे न बढ़ाने की एवज में दरोगा ने 20 हजार रुपये की डिमांड की। दरोगा महेशपाल ने महिला हेल्प डेस्क पर बुलाकर जैसे ही निजार से 5000 रुपये लिए, तुरंत उन्हें एंटी करप्शन ब्यूरो ने उसे पकड़ लिया।

पांचवां मामला लखनऊ का है। यहां माल थाने में पांच हजार रिश्वत लेते दारोगा बलकरन सिंह को एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। दारोगा पर एक मामले में रिपोर्ट लगाने की एवज में पीड़ित से 5 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर नूरुल उदा खान ने बताया कि रिश्वत लेते दारोगा बलकरन सिंह को गिरफ्तार किया गया है। जनवरी 2024 में माल थाना क्षेत्र के गांव सुर्ती खेड़ा में दस बिस्वा जमीन को लेकर सुरफान के साथ मेहंदी हसन व आरिफ का झगड़ा हुआ था। मारपीट में सुरफान व उसके परिवार के सदस्यों को काफी चोट आई थी। रिपोर्ट लगाने के लिए बीट दारोगा बलकरन ने रिश्वत की मांग की थी।

छठा मामला बरेली का है। एंटी करप्शन बरेटी यूनिट की टीम ने प्रवेश पत्र देने के नाम पर 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते प्रवक्ता प्रदीप कुमार सिंह को अरेस्ट किया है। इसके खिलाफ एंटी करप्शन की तरफ से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का केस दर्ज किया गया है। टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर प्रवीण सान्याल ने बताया कि फरीदपुर कॉलेज में बिथरी चैनपुर निवासी हुकुम सिंह वर्ष 2024 की 12 वीं की परीक्षा का प्रवेश पत्र लेने के लिए गए थे। जहां प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने 3 हजार रुपए रिश्वत मांगी। पीड़ित हुकुम सिंह ने जैसे ही प्रवक्ता प्रदीप को 3 हजार रुपए की रिश्वत दी तो कॉलेज के लैब से प्रदीप को अरेस्ट कर रिश्वत के पैसे बरामद कर लिए। आरोपी के खिलाफ फरीदपुर थाने में ही केस दर्ज कराया गया है।

सातवां मामला आजमगढ़ बेसिक शिक्षा विभाग का है जहां बाबू को घूस लेते एंटी करिप्शन टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। एंटी करप्शन टीम ने जाफरपुर स्थित बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक शिक्षा निदेशक कार्यालय के लिपिक को एक लाख रुपये घूस लेते रंगे हाथ दबोच लिया। वह बलिया जनपद के एक विद्यालय संचालक से मान्यता दिलाने के नाम पर घूस ले रहा था। सूत्रों के अनुसार इस मामले में एडी बेसिक की भी संलिप्तता पाई गई है। एंटी करप्शन की टीम ने दोनों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है।

आठवां मामला गोण्डा जिले का है यहां सदर तहसील क्षेत्र के बिशुनपुर बैरिया ग्राम पंचायत में तैनात लेखपाल का जमीन पैमाइश और अवैध अतिक्रमण हटवाने के नाम पर पीड़ित से 200 रुपए घूस लेते वीडियो वायरल हुआ है। सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत बिशुनपुर बैरिया गांव के रहने वाले रघुराज ने अवैध अतिक्रमण हटवाने और पैमाइश को लेकर जिला अधिकारी नेहा शर्मा को शिकायती पत्र दिया था। जिला अधिकारी नेहा शर्मा ने लेखपाल संतोष शर्मा को जमीन की पैमाइश कर अवैध अतिक्रमण हटवाने के निर्देश दिए थे। लेखपाल ने शहर के गायत्री पुरम चौराहे पर बुलाकर के शिकायतकर्ता से 3000 रिश्वत की मांग की। अंततः 200 रूपये में सौदा तय हुआ। शिकायतकर्ता ने इसका वीडियो बना करके सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। डीएम के आदेश पर लेखपाल उप जिलाधिकारी कार्यालय से सम्बद्ध है, उसे बिना अनुमति के मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नही है।

9 वां मामला जौनपुर ट्रेज़री ऑफिस का है। यहां एन्टी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुये कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ट्रेजरी ऑफिस के अकाउंटेंट दयाराम गुप्ता को पकड़ा। आरोप है कि अकाउंटेंट ने पीड़ित से 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि उसकी मां स्व. पराना देवी के पेंशन के एरियर के भुगतान को खाते में ट्रांसफर करने के बदले में 5000 रुपए के रिश्वत की मांग की गई थी।

10 वां मामला अयोध्या का है। यहां एण्टी करप्शन टीम ने अयोध्या के रुदौली तहसील में तैनात लेखपाल शिव कुमार पांडेय को 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। लेखपाल शिवकुमार पांडेय ने रेहरा बड़ागावं निवासी नीलाम्बर यादव से जमीन की पैमाइश के लिये 6 हजार रुपयों की मांग की थी। नीलांबर ने मामले की शिकायत विजिलेंस विभाग में की थी। लेखपाल को गिरफ्तार करने वाली विजिलेंस टीम के प्रभारी अजय प्रताप सिंह ने गिरफ्तारी की पुष्टि की।

11 वां मामला भी अयोध्या का है। यहां एंटी करप्शन की टीम ने 5,000 रूपए घूस लेते हुये लेखपाल मोती लाल यादव को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी लेखपाल के खिलाफ बीकापुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। लेखपाल पैमाइश के नाम पर पांच हजार रुपए रिश्वत ले रहा था। कोतवाली क्षेत्र के सल्हीपुर निवासी मनोज कुमार विश्वकर्मा से लेखपाल ने जमीन की पैमाइश करने के लिए 7000 हजार रूपए रिश्वत मांगा था। पीड़ित किसान का आरोप है कि पैसा देने के बावजूद लेखपाल ने पैमाइश नहीं किया। बल्कि दोबारा 5000 अधिकारियों को देने की बात करते हुए रिश्वत मांगने लगा। मजबूर होकर इसके बाद पीड़ित ने एंटी करप्शन टीम को शिकायत किया। एंटी करप्शन टीम ने जोहन बाजार स्थित एक चाय की दुकान पर लेखपाल को 5000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

12 वां मामला भी अयोध्या का है। यहां एक एक लेखपाल का रिश्वत लेते हुये वीडियो वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति काश्तकार से रिश्वत लेते हुये दिखाई दे रहा है। पता करने पर जानकारी मिली कि रिश्वत ले रहा लेखपाल लक्ष्मीकान्त है जो शुरुवारी निवासी प्रदीप सिंह से रिश्वत ले रहा है। 13 वां मामला भी अयोध्या से जुड़ा है। यहां अमानीगंज ब्लाक में तैनात खण्ड विकास अधिकारी सुरेन्द्र सिंह राणा पर पांच हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा था। अमानीगंज के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पवन सिंह ने मुख्यमंत्री से इस संदर्भ में शिकायत की थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद,उन्हे ग्राम्य विकास आयुक्त लखनऊ के कार्यालय में समबद्व किया गया है। अखिलेश गुप्ता ने अमानीगंज के नये खण्ड विकास अधिकारी के रूप में चार्ज लिया।

14 वां मामला देवरिया जिले का है। यहां एंटी करप्शन टीम ने ग्राम विकास अधिकारी रजनीश भारती को आठ हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी अपनी तैनाती स्थल ग्राम पंचायत सिरसिया पवार के प्रधान पुत्र से रिश्वत ले रहा था। इस संबंध में जानकारी देते हुए बनकटा थाना प्रभारी अमित राय ने बताया कि बनकटा विकास खंड के सिरसिया पवार के प्रधान पुत्र सुशील मिश्रा से ग्राम पंचायत में हुए विकास के मद में भुगतान के लिए ग्राम विकास अधिकारी रजनीश भारती ने 10 प्रतिशत कमीशन मांगा था। प्रधान के पुत्र ने इसकी शिकायत मुख्य विकास अधिकारी से की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार प्रधान पुत्र की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम की गोरखपुर ने रुपये लेते हुए ग्राम विकास अधिकारी रजनीश भारती को रंगे-हाथ पकड लिया।

15 वां मामला बस्ती जिले का है। यहां बनकटी ब्लाक मुख्यालय पर एक चाय की दुकान में ग्राम पंचायत आम कोईल के रोजगार सेवक अब्दुल रहीम उर्फ जुम्मन निवासी ग्राम सूरापार नेवारी, थाना लालगंज जनपद बस्ती को एण्टी करप्शन टीम ने 50 हजार रिश्वत लेते हुये गिरफ्तार किया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आम कोईल रतन लाल यादव ने इसकी शिकायत किया था। रोजगार सेवक को कच्चे कार्य की स्वीकृति हेतु पचास हजार रुपये घूस लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

16 वां मामला रामपुर जनपद के तहसील मिलक का है। यहां उप जिलाधिकारी के पेशकार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों एंटी करप्शन की टीम ने गिरफ्तार किया है। उप जिलाधिकारी के पेशकार मोहम्मद जुनैद ने कृषि भूमि को आवासीय दर्ज करने के नाम पर एक किसान से 20 हजार की मांगी थी। किसान ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन से की। पीड़ित किसान एसडीएम के पेशकार जुनैद को तहसील में पैसे देने के लिए पहुंचे और जैसे ही ₹20000 पेशकार को दिए, टीम ने पेशकार मोहम्मद जुनैद को गिरफ्तार कर लिया। टीम के सीओ फैज़ल सिद्दीकी ने बताया भगवत शरण पुत्र लीलाधर ग्राम निपानिया थाना शहज़ाद नगर ने टीम से शिकायत किया था।

17 वां मामला गोंडा जिले का है। यहां एंटी करप्शन की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ सहायक धर्मेश कुमार राय को 5 हजार रूपये रिश्वत लेते हुये गिरफ्तार किया है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति दिलाने के नाम पर वरिष्ठ सहायक ने रिश्वत मांगी थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत गोंडा देवी पाटन मंडल की एंटी करप्शन टीम से की थी। गोंडा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्रकोष्ट में तैनात वरिष्ठ सहायक धर्मेश कुमार राय ने कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के बिशुनपुर बैरिया गांव के रहने वाले रघुराज सोनकर से 5000 रिश्वत की मांगी थी। रिश्वतखोरी के ये गिने चुने मामले हैं जो हमारे सज्ञान में आये। आप जानते हैं हजारों में कहीं एक मामला वायरल होता है अथवा कोई एक व्यक्ति हिम्मत करके शिकायत दर्ज करवाता है और गिरफ्तारी होती है। सरकार को रिश्वतखोरी पर प्रभावी रोक लगानी चाहिये और ऐसा न हो पाये तो रिश्वत का रेट ही तय कर देना चाहियें जिससे जनता अधिकारियों और कर्मचारियों की कीमत जान जाये।


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