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30 सितम्बर 2020
30 सितम्बर 2020

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अपना रिमोट दूसरे के हाथों में न दें युवा

Posted on: Tue, 01, Sep 2020 2:52 PM (IST)
अपना रिमोट दूसरे के हाथों में न दें युवा

अशोक श्रीवास्तव- देश की जीडीपी ने हतप्रभ कर दिया। 40 में पहली बार इतनी बड़ी गिरावट देखी गयी है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं वाकई मोदी का कोई विकल्प नही है। अंधभक्त इस पर भी तालियां बजा रहे हैं। दरअसल युवाओं की सोचने समझने और निर्णय लेने की क्षमता क्षीण हो जाये या फिर उसे गलत दिशा में डायवर्ट कर दिया तो हजारों मोदी मिलकर देश का भविष्य नही संवार सकते।

सारा देश जानता है युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य होता है और यही युवा आज सही गलत में फर्क नही कर पा रहा है। आप सोच सकते हैं हम कहां जा रहे हैं। पर्सनालिटी डेवलपमेंट की कक्षाओं में अक्सर बताया जाता है जो मन कहे, अथवा जिसमे संतुष्टि मिले वो काम करो। लेकिन युवा वो कर रहे हैं जो उनसे कहा जा रहा। अपना मेन स्विच दूसरे के हाथ में हो तो क्या हो सकता है आसानी से समझा जा सकता है। विगत 7 सालों में किसी नौजवान के मां बाप मर गये हों और वह नौकरी पा गया हो तो नही कह सकते, बाकी युवा नेताओं के पिछलग्गू बनकर अपना भविष्य संवार रहे हैं। कुछ सोच नही पा रहे हैं क्या करें, तो कुछ पसंद न रहते हुये भी कोई काम कर रहे हैं।

कुछ डीप डिप्रशन में जाकर आत्महत्या जैसे खौफनाक कदम उठा रहे हैं। सरकारी नौकरियों के चक्कर में जवानी बुढ़ापे में बदल रही है। जब तक युवा खुद निर्णय नही लेंगे, अच्छे बुरे और गलत सही में फर्क करना नही सीखेंगे तब वे इस्तेमाल होते रहेंगे। इससे देश का भविष्य नही संवरेगा। देश का नौजवान ये भूल गया है कि युवा भीड़ का हिस्सा नही हुआ करते, वे आगे चलते हैं और सारा जमाना उनके पीछे चलता है किन्तु आज युवा दूसरों के फैसलों पर अपनी जवानी दांव पर लगा देते हैं। देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है, कहा गया था देश बदल रहा है।

अगर इसी बदलाव का वादा था तो निश्चित रूप से वादा करने वाले भूत भविष्य वर्तमान सबकी जानकारी रखते हैं। उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं, पावरलूम उद्योग खत्म हो रहा है, लघु एवं कुटीर उद्योगों की बात तो बेमानी हो गयी है, मनरेगा से देश का भविष्य संवारने की कोशिश हो रही है। जबकि यह गैर उत्पादक परियोजना है। मौजूदा बजट में जो मिट्टी उठाकर एक जगह से दूसरे जगह रखी जाती है, अगले साल बारिश में फिर उसी स्थान पर पहुंच जाती है। ऐसे कामों से महज कुछ दिनों का काम मजदूर वर्ग को मिल जाता है।

लेकिन इससे उनके जीवन में स्थिरता नही आने वाली है। या फिर मनरेगा मजदूर मजदूरी के पैसों से अपने बच्चों को अच्छा भविष्य नही दे सकता है। इससे दो मकसद पूरे होते हैं बस वह जिंदा रह सकता है, और जिम्मेदारों को उसका निवाला डकारने का अवसर मिल सकता है। सरकार शायद यही चाहती है। सरकार युवाओं को दिशा देगी, उन्हे संभालेगी, रोजगार देगी और राष्ट्र निर्माण में उनकी क्षमता का अधिकाधिक इस्तेमाल करेंगी इसकी संभावनायें खत्म हो चुकी हैं। क्योंकि पिछले 7 सालों में युवाओं का इस्तेमाल पार्टी की पोजीशन ठीक करने में किया गया है। बेहतर होगा युवा खुद संभलें। कुछ सोचे, नया करें, अलग ढंग से करें, संभावनायें कभी खत्म नही होती।

छोटे लक्ष्य बनाये, एक एक कर हासिल करते जायें, पैसों की, वक्त की, व्यक्तित्व की बरबादी रोंके, कुछ बनाये निर्माण करें, मार्केंटंग करें, सफल होने पर दूसरों को भी अवसर दें। ऑनलाइन शापिंग, होम डिलिवरी सिस्टम, कम्प्यूटर जॉब, डिजिटल पेमेण्ट, मैन्यूफैक्चरिंग, मार्केटिंग, मत्सय पालन, फूलों, सब्जियों की खेती, आर्गेनिक और हर्बल उत्पादों की आउटलेट, डिजायनिंग, कोरियर और बीमा के क्षेत्र में संभावनाओं की कमी नही है। बस युवा एक एक संकल्प लें, वे किसी भीड़ का हिस्सा बनकर दोनो बाहें उठाकर किसी का जिंदाबाद मुर्दाबाद नही बोलेगे, बल्कि खुद के लिये और कुछ सक्षम होने पर परिवार फिर देश के लिये जियेंगे। खुद को ऐसा तैयार करना होगा कि कोई तुम्हारा इस्तेमाल न कर सके। युवा यदि खुद को देश का भविष्य मानते हैं तो अपनी जिंदगी का रिमोट दूसरें के हाथो में न दें।