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07 मई 2021
07 मई 2021

समाचार > संपादकीय

आव कोरोना आव! बस्ती में..

Posted on: Wed, 21, Apr 2021 10:23 PM (IST)
आव कोरोना आव! बस्ती में..

कुछ लोग सोशल मीडिया पर भाग कोरोना भाग का प्रतीकात्मक फोटो इत्यादि पोस्ट कर संक्रमितों और आम जनमानस का हौसला बढ़ाते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसा आचरण कर रहे हैं मानों वे संक्रमण को दावत दे रहे हों। मीडिया दस्तक के कैमरे में कई ऐसी तस्वीरें हैं जो यह समझने के लिये काफी होंगी कि लोग कोरोना के संक्रमण को खुद ही बुला रहे हैं। आव कोरोना आव! बस्ती जनपद में पंचायत चुनाव के लिये मतदान जितना निकट आ रहा है, उतना ही काविड प्रोटोकाल को लेकर लोगों की लापरवाहियां बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को यहां प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। इस दौरान मेले जैसा दृश्य था। विकास भवन से लेकर ब्लाक मुख्यालयों तक प्रत्याशियों और समर्थकों की भीड़ कोरोना वायरस के संक्रमण को खुद ही दावत दे रही हो। चुनाव चिन्ह खरीदने के लिये न्याय मार्ग पर सजी दुकानों पर उमड़ी प्रत्याशियों और समर्थकों को न उचित दूरी का ध्यान था और न ही मास्क, सेनेटाइजर का। बस एक दूसरे से सटकर खड़े थे, कुछ के खड़े रहने की वजह थी, कुछ बेवजह खड़े थे। उन्हे कोई रोकने टोकने वाला भी नही था। महिला प्रत्याशी भी इसी भीड़ का हिस्सा थीं। धक्का मुक्की के बीच घण्टों इंतजार के बाद उन्हे सिम्बल मिला। यही हाल जलपान की दुकानों का था। अव्वल दर्जे की मूर्खता है ऐसे वक्त में चुनाव कराना, और दोयम दर्जे की मूर्खता है कोविड प्रोटोकाल का पालन न करा पाना।

फिलहाल काफी देर बाद पुलिस की गाड़ी आई, कान्स्टेबल उतरकर डंडा पटकने लगे, बगैर मास्क वालों की फटाफट मोबाइल में फोटो उतरने लगी। कुछ दहशत में आये और कुछ घाघ बनकर खड़े रहे। 20 मिनट बाद पुलिस की गाड़ी चली गयी और दृश्य फिर पहले जैसा हो गया। मतदाताओं को रिझाने के लिये जो प्रत्याशी गावों में भ्रमण कर रहे हैं उनका पैर भी छू रहे हैं और गले भी मिल रहे हैं। संक्रमण के खतरे से बिलकुल बेफिक्र। जिन हालातों में चुनाव हो रहे हैं उनमे प्रत्याशियों की इस हरकत में जनता की रहनुमाई करने वाला किरदार दिखता है या उसे कोरोना जैसी महामारी की चपेट में धकेलने वाला जाहिल गंवार। हालांकि जनता भी ऐसे किरदारों को पसंद करती आई है।

देश में रोजाना करीब डेढ़ हजार और प्रदेश में करीब डेढ़ सौ मौतें हो रही हैं। राजनेताओं, निर्वाचन आयोग और अफसरों की हिम्मत का दांज दी जानी चाहिये जो इस बार लाशों के ढेर पर चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराने का खास तज़ुर्बा हासिल कर रहे हैं। हमने पहले ही कहा था कि निर्वाचन आयोग की मूंर्खता का दंड पूरा देश भुगतेगा। देश में कोरोना वायरस का संक्रमण जितना तेजी से फैल रहा है ऐसे हालातों में चुनाव कराने का फैसला लेने का साहस कोई नही जुटा पायेगा। निश्चत रूप से अंदरखाने में कुछ और चल रहा है। फिलहाल तब तक हमें इन अटकलों की हकीकत जानने का इंतजार करना होगा तब तक निर्वाचन आयोग के किसी बड़े अफसर को इसका इनाम न मिल जाये।