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14 अप्रैल 2021
14 अप्रैल 2021

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प्रशासन ने छीना सैकड़ों का रोजगार, कहां जायें बेबस, लाचार..

Posted on: Sun, 28, Feb 2021 8:56 PM (IST)
प्रशासन ने छीना सैकड़ों का रोजगार, कहां जायें बेबस, लाचार..

बस्तीः जिला प्रशासन का बुलडोजर इन दिनों कहर बरपा रहा है। ये कहर उन पर है जो सड़क किनारे दुकानें लगाकर कई दशकों से अपना परिवार चला रहे हैं। पिछले दो सालों में जिला प्रशासन ने शायद ही किसी को बसाने और उन्हे स्वरोजगार का अवसर देने का काम किया हो, लेकिन उजाड़ा और रोजगार सैकड़ों का छीन लिया।

तेज तर्रार जिलाधिकारी को मानवीय संवेदनाओं से कोई लेनादेना नही है। जो लोग 60-70 सालों से दुकान करते आ रहे हैं, बाकायदा एडवांस दिये हैं और रसीदों पर किराया देते हैं उन्हे न्याय दिलाने की बजाय उनकी छाती पर बुलडोजर चला दिया गया। वर्तमान समय में कहने को जिला प्रशासन जीरो टॉलरेंश पर कार्य कर रहा है। असलियत ये है कि विभागों से भ्रष्टाचार रत्ती भर कम नही हुये बल्कि कई गुना बढ़ गये। स्वास्थ्य, शिक्षा, निबंध, परिवहन, आबकारी, बीडीए, खाद्य रसद सहित तमाम सरकारी महकमों के भ्रष्टाचार से जनता त्रस्त है।

इसे नियंत्रित करने की इच्छाशक्ति किसी के पास नही है, सारा पॉवर जनता से छीनने में इस्तेमाल किया जा रहा है। देने की बारी आती है तो किरदारों को सांप सूंघ जाता है। इतना ही नही जो जनता के दरवाजे पर चुनाव के समय हाथ जोड़कर भीख मांगने के अंदाज में नजर आते थे वे जन संवेदनाओं से मुह मोड़कर गाड़ियों का शीशा चढ़ाकर निकल जा रहे हैं। अपने सामने ही वे जनता की बरबादी देख रहे हैं। कहते हैं नेताओं के लिये जनता जनार्दन होती है। चुनाव जीतने के बाद जनार्दन का इतना तिरस्कार होगा किसी ने सोचा भी नही था। विपक्षी दलों के नेता भी प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने का साहस नही जुटा पा रहे हैं।

विगत कुछ दिनों से चाहे वह जिला पंचायत की सम्पत्ति का मामला हो या नगरपालिका परिषद बस्ती का, प्रशासन द्वारा लगातार भवनों का ध्वस्तीकरण तथा सीजर की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन के इस कठोर कदम से सैकड़ों लोग बेरोजगार होकर आज सड़को पर आ चुके हैं। सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार मुहैया नही करा सकी लेकिन बस्ती के सैकड़ों दुकानदारों का निवाला छीन लिया। बताते चले कि विगत दिनों जिला प्रशासन नें टाउन क्लब के परिसर में बने दर्जनों दुकानों को अवैध कब्जा मानते हुए बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त कर दिया।

लगभग दर्जनों परिवार सड़को पर आ गये और दाने-दाने के मोहताज हो गयें। विरोघ के स्वर तो मुखर हुए लेकिन तानाशाह किरदारों के आगे लाचार होना पड़ा। शहरी क्षेत्र में हुई यह पहली कार्रवाई थी। दूसरी कार्रवाई जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला पंचायत के भवनों पर हुई। यहां दर्जनों आवासीय भवनों को सील कर दिया। जिससें प्रशासन के इस अराजकता पूर्ण कार्रवाई की चौतरफा निन्दा हो रही है। पूर्व मंत्री रामकरन आर्य, लालमणि प्रसाद और वरिष्ठ पत्रकार मुस्लिम सिद्धरकी के आवास इसी इलाके में थे। प्रशासन ने किसी की एक नही सुनी।

लालमणि प्रसाद बसपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे, रामकरन आर्य का भी सपा के कार्यकाल में जलवा था, सभी का जिला पंचायत से एग्रीमेण्ट था। लालमणि प्रसाद का एग्रीमेण्ट जुलाई 2021 तक था। उनका आवंटन रद कर समय से पहले उन्हे आवास से बेदखल कर दिया गया। जबकि सत्ता की हनक में सदर विघायक दयाराम चौधरी का आवास नही सील किया गया। इससे जिला प्रशासन का दोहरा मापदण्ड उजागर हुआ है। तीसरी कार्रवाई जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर पालिका परिषद नें रविवार को प्रातः 11 बजें की। चर्च गेट पर लगभग 36 दुकानों को बिना किसी पूर्व सूचना के सील कर दिया गया।

हरि प्रसाद साहू बतातें है कि यहां 1990 से अपना दुकान चला रहे हैं। उन्होने बताया कि समय-समय सें किराया भी जमा करते रहे। आवंटन का विधिवत एग्रीमेन्ट भी है लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के तीन दर्जन से अधिक दुकानों को बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त करवा दिया गया। पकौड़ी चौराहे पर हुई इस कार्रवाई में लखमनी, महेश अम्बिकेशधर द्विवेदी, रमाकान्त यादव, मो0 उमर, तारा पाठक सहित दर्जनों दुकानदार बेरोजगार होकर सड़को पर आ गये है। चर्च गेट पर पहुंची पत्रकारों को दुकानदारों ने घेर लिया। अपना दर्द बयां करने लगे, उनके चेहरों पर बरबादी का दर्द साफ देख जा सकता था।

दुकानदारों के साथ उनके छोटे छोटे बच्चे भी आ गये। बेबसी लाचारी की ऐसी तस्वीर जिसे देखकर हर इंसान का कलेजा हिल जायेगा। लेकिन प्रशासन के तेवर अंग्रेजी हुकूमत से कम नहीं। एक हफ्ते पहले यहां बस्ती महोत्सव था। जानी मानी हस्तियां यहां आई। भरपूर मनोरंजन हुआ, इन दुकानदारों को कहां पता था कि महोत्सव के बाद गजब का सन्नाटा होगा और वाद्य यन्त्रों के शोर में उनकी बरबादी की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। शिवओम गुप्ता, तेजनरायन शुक्ल, बृजेश चौधरी, अमित पाण्डेय, मालती देवी, भोलानाथ शुक्ल सहित दर्जनों दुकानदरों ने कहा अब वे कहां जायें, क्या करें, किससे फरियाद करें, रोजगार तो छिना ही चर्च को दिया एडवांस भी डूब गया। ऐसे अनेक सवाल हवा में तैर रहे हैं। इन सवालों के जवाब किसी को नही मालूम लेकिन नतीजे सभी को पता हैं।